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Wednesday, June 07, 2023

ओढ़े दरख़्त

ओढ़े दरख़्त 
कम्बल कोहरे के
खड़े संन्यासी 

-डा॰ अनिल सक्सेना ‘ज़ाहिर’

Saturday, May 20, 2023

ओस की बूँद

ओस की बूँद 
फूल से धूल तक
जीवन-यात्रा 

-डॉ. अनिल सक्सेना ‘ज़ाहिर

Tuesday, January 24, 2023

धूप ने ओढ़ी

धूप ने ओढ़ी
मटमैली ओढ़नी 
धरा निराश 

-शशि पाधा 

Saturday, November 12, 2022

ओस के कण

ओस के कण
बना देते सागर
मिल जो जाते

-डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘उदार'



Tuesday, November 01, 2022

ओस की बूँद

ओस की बूँद 
ठहरी घास पर 
आकाश रोया

-रंजना झा

ओस की बूँद

ओस की बूँद 
ठहरी घास पर 
आकाश रोया

-रंजना झा

Monday, October 10, 2022

ओझल रहे

ओझल रहे
परदे में चलते
धोखे के खेल

-अमिता शाह 'अमी'


Thursday, September 15, 2022

भोर ने ओढ़ा

भोर ने ओढ़ा
कोहरे का दुपट्टा
धूप नाराज़
-कृष्णा वर्मा

Wednesday, September 14, 2022

ओढ़ ली कब

ओढ़ ली कब
बुढ़ापे की चादर
पता न चला
-निर्मल सिद्धू 

Friday, September 09, 2022

ओढ़ कम्बल

ओढ़ कम्बल
धरती आसमान
फूट के रोये
-मानोशी चटर्जी

Tuesday, August 30, 2022

ओढ़ के बैठे

ओढ़ के बैठे  
श्वेत चादर बर्फ़ की 
पेड़ों के झुंड  
-मंजु मिश्रा

Tuesday, August 23, 2022

ओढ़े बैठी है

ओढ़े बैठी है
कोहरे की चादर
शाम सुहानी
-भावना कुँअर