तुम्हारा प्यार
खोलता अनदिखे
ज्योति के द्वार!
-शैलजा सक्सेना
याद-बारिश
भीगता मन हुआ
मन भर का
-शैलजा सक्सेना
भाग्य-रेखा से
धरा की हथेली पे
पेड़ की जडें
-शैलजा सक्सेना
संक्षिप्त मृत्यु
रोज़ चली आती है
नींद बन के!
-डॉ. शैलजा सक्सेना
बरसीं यादें
भीगता मन हुआ
मन भर का!
-डॉ. शैलजा सक्सेना
भँवरे सुनाएँ
मधु-पत्र प्रिय का
हवा मुस्काए!
-डॉ. शैलजा सक्सेना
रोने भी दे
क्यों चिपकाऊँ व्यर्थ
मुस्कान झूठी!
-डॉ. शैलजा सक्सेना
कूका बसंत
क्यारियाँ मुस्कुराईं
महकी हवा
-डॉ. शैलजा सक्सेना
गद्य जीवन
कवितामय तुम हो
गाऊँ तो कैसे!
-डॉ. शैलजा सक्सेना
सूना आँगन
गौरैया ढूँढ़े दाना
कहाँ हैं लोग
-शैलजा सक्सेना
मेघ फिरते
गिलहरी–सी धूप
भागी, दुबकी
-शैलजा सक्सेना
नशे में डूबे
बच्चे खेतिहर के
धरती रोये
-शैलजा सक्सेना
दोस्ती खुशबू
हाथ पकड़े डोले
दूरियों में भी
-शैलजा सक्सेना
ऊँची बिल्डिंगें
कटा–फटा रूमाल
आकाश झाँके
-शैलजा सक्सेना
कूद के भागे
पहाड़ के कंधों से
शिशु–झरने
-शैलजा सक्सेना