Showing posts with label *शीतल जैन. Show all posts
Showing posts with label *शीतल जैन. Show all posts

Wednesday, February 22, 2023

खोती अस्तित्व

खोती अस्तित्व
मिलती सागर में 
नदी जाने क्यों 

-शीतल जैन 

Thursday, November 03, 2022

पकी अमियाँ

पकी अमियाँ
पेड़ से टूट गिरी
मैना उदास

-शीतल जैन


शाम के माथे

शाम के माथे
चमके चम-चम
चाँद की बिंदी

-शीतल जैन

पीली चिड़िया

पीली चिड़िया
दाना खोजने उड़ी
लौटी क्यों नहीं? 

-शीतल जैन

चींटीं चलतीं

चींटीं चलतीं
कतार बनाकर 
पूरी मिलिट्री 

-शीतल जैन

बारिश बन

बारिश बन
पेड़ों के पत्तों पर
गिरती रात

-शीतल जैन

मकड़ी जैसे

मकड़ी जैसे
बुनती मानवता
भ्रम का जाल

-शीतल जैन

सूरज मौन

सूरज मौन
साँझ की तुरपन
करेगा कौन

-शीतल जैन

रफू करती

रफ़ू करती
सूरज की परतें
दर्जिन साँझ

-शीतल जैन

रीसायक्लिंग

रीसायक्लिंग
सही अर्थ बताता
बया का नीड़ 

-शीतल जैन

निर्भय खग

निर्भय खग
सड़कों पर दौड़े
इंसान कैद 

-शीतल जैन

कोयल कूके

कोयल कूके
बिछड़ा साथी ढूँढ़े
कातर मन 

-शीतल जैन

Tuesday, August 23, 2022

काँधों पे लादे

काँधों पे लादे 
सूरज की पोटली
साँझ निढाल
–शीतल जैन