ठहरे हम
उम्र की पगडंडी
देखती राह
-अन्जना 'अनजान'
दिवस बीता
खेल का समापन
घर वापसी
-अन्जना 'अनजान'
तुम हो साथ
हो जाये कुछ बात,
बीते ये रात
-अन्जना 'अनजान'
वर्षा का अन्त
बसन्त का आगमन
खिलेंगे फूल
-अन्जना 'अनजान'
वटवृक्ष-सी
छाँव है मेरी माँ की
जीवन-धूप
-अन्जना 'अनजान'
जुगनू जले
रहे आकाश तले
दिखाते पथ
-अन्जना 'अनजान'
स्वर्ग की कुंजी
माँ के पैरों के नीचे
माँ को समझो!
-अन्जना 'अनजान'
उजाला जहाँ
छाया बनती वहाँ
रहती साथ
-अन्जना 'अनजान'
कौन बुलाता !
समन्दर की ओर
चलीं नदियाँ!
-अन्जना 'अनजान'