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Wednesday, April 24, 2024

खाना बनाते

खाना बनाते 
आँगन बुहारते 
गाती थी अम्मा 
-नितीन उपाध्ये 

खेत हैं प्यासे

खेत हैं प्यासे 
लिए वर्षा की आस
मेघ दे झाँसे
-अनिल सक्सेना ‘ज़ाहिर’

ख़ुश मत हो

ख़ुश मत हो
मात्र पुतला जला
रावण नहीं 
-आलोक मिश्रा

Friday, June 02, 2023

खत्म न होता

ख़त्म न होता
हार जीत का क्रम 
संघर्ष जारी

-अन्नदा पाटनी 
   

Tuesday, May 02, 2023

खेतों में ओले

खेतों में ओले
मनाने पिकनिक 
दौड़ा शहर ! 

-डॉ. नितीन उपाध्ये

Saturday, March 11, 2023

ख़ुदगर्ज़ी ने

ख़ुदगर्ज़ी ने
मिलने नहीं दिया 
धरा-आकाश 

-डॉ० दुर्गा सिन्हा 'उदार'

Wednesday, February 22, 2023

खोती अस्तित्व

खोती अस्तित्व
मिलती सागर में 
नदी जाने क्यों 

-शीतल जैन 

Sunday, December 18, 2022

खिडकी-ओट

खिडकी-ओट
बतियाते कई बार
धूप-सखी से 

-उर्मिला मिश्रा

Tuesday, November 01, 2022

खग विदेशी

खग विदेशी 
करते मनुहार 
शरद ऋतु

-रंजना झा

खुला आसमाँ

खुला आसमाँ
शिला-झील का जाल 
गगन तले 

-शोनाली श्रीवास्तव

Monday, September 12, 2022

खिड़की खोली

खिड़की खोली
झोंका हवा का आया 
धूल भी लाया

-चित्रा गुप्ता

Friday, September 09, 2022

खेले सरसों

खेले सरसों
वासंती हवा संग
धरा लजाये
-मानोशी चटर्जी

Monday, September 05, 2022

खोजती सूर्य

खोजती सूर्य
जुगनू की दुशाला
ओढ़े रजनी
-हेमा शंकर

खोजती रही

खोजती रही
पौर वाली वे रातें
सूनी चैपाल
-ममता मिश्रा

Thursday, September 01, 2022

खुला आकाश

खुला आकाश
खिड़की से झाँकते
पुराने कैदी
-उमेश मौर्य

खड़े हैं शान्त

खड़े हैं शान्त
जंगल में तैनात
चीड़ के पेड़
–अर्बुदा ओहरी

Sunday, August 28, 2022

खिचीं दीवारें

खिचीं दीवारें
हो गये बँटवारे
कुछ न बचा
-रेणु चन्द्रा माथुर 

Tuesday, August 23, 2022

खिले हैं पुष्प

खिले हैं पुष्प
हरी धरती खिली
खिला वसंत
-पूजा अनिल

खुशबू फैली

खुशबू फैली
बारिश भीगी-भीगी
मिट्टी की नमी
-प्रियंका पांडेय

खिलखिलाते

खिलखिलाते
अल्हड़ झरने-सी
बूगन बेल

-सोनल रस्तोगी