तीन बतखें
जीवन की झील में
ढूँढती राह
-रचना श्रीवास्तव
छिड़का पानी
आँगन बिछी खाट
गर्मी की रात
-रचना श्रीवास्तव
सिकुड़ी खड़ी
कोहरे में लिपटी
बेबस रात
-रचना श्रीवास्तव
शांत लहर में
गुमसुम था चाँद
तट पे हम
-रचना श्रीवास्तव
वर्षा पहने
बूँदों सजा लहँगा
मटक चले
–रचना श्रीवास्तव
भोर किरण
हौले से गुदगुदा
खिलाती फूल
-रचना श्रीवास्तव
बो दी है भोर
आँगन में किसने
सपने उगे
-रचना श्रीवास्तव
बेटे का कोट
रोज धूप दिखाती
प्रतीक्षा में माँ
-रचना श्रीवास्तव
पका मौसम
झील की रसोई में
महकी हवा
–रचना श्रीवास्तव
सुबह हुई
लेकर अँगड़ाई
जागे पुष्प भी
-रचना श्रीवास्तव
दूषित हवा
पूरी रात खाँसता
चाँद बेचारा
-रचना श्रीवास्तव
तुमने छुआ
शांत झील में उठी
तीव्र लहर
-रचना श्रीवास्तव
कचरा गिरा
घायल हुई झील
सिमट गई
-रचना श्रीवास्तव
उड़ती भोर
तितली के पंखों में
बाँध के रंग
-रचना श्रीवास्तव