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Wednesday, October 05, 2022

तीन बत्तखें

तीन बतखें
जीवन की झील में
ढूँढती  राह 

-रचना श्रीवास्तव

Thursday, September 08, 2022

छिड़का पानी

छिड़का पानी
आँगन बिछी खाट
गर्मी की रात
-रचना श्रीवास्तव

Wednesday, August 31, 2022

सिकुड़ी खड़ी

सिकुड़ी खड़ी
कोहरे में लिपटी
बेबस रात
-रचना श्रीवास्तव

शांत लहर में

शांत लहर में
गुमसुम था चाँद
तट पे हम
-रचना श्रीवास्तव

वर्षा पहने

वर्षा पहने
बूँदों सजा लहँगा
मटक चले
–रचना श्रीवास्तव

भोर किरण

भोर किरण
हौले से गुदगुदा
खिलाती फूल
-रचना श्रीवास्तव

बो दी है भोर

बो दी है भोर
आँगन में किसने
सपने उगे
-रचना श्रीवास्तव

बेटे का कोट

बेटे का कोट
रोज धूप दिखाती
प्रतीक्षा में माँ
-रचना श्रीवास्तव

पका मौसम

पका मौसम
झील की रसोई में
महकी हवा
–रचना श्रीवास्तव

सुबह हुई

सुबह हुई
लेकर अँगड़ाई
जागे पुष्प भी
-रचना श्रीवास्तव

दूषित हवा

दूषित हवा
पूरी रात खाँसता
चाँद बेचारा
-रचना श्रीवास्तव

तुमने छुआ

तुमने छुआ
शांत झील में उठी
तीव्र लहर
-रचना श्रीवास्तव

कचरा गिरा

कचरा गिरा
घायल हुई झील
सिमट गई
-रचना श्रीवास्तव

उड़ती भोर

उड़ती भोर
तितली के पंखों में
बाँध के रंग

-रचना श्रीवास्तव