गद्य जीवन
कवितामय तुम हो
गाऊँ तो कैसे!
-डॉ. शैलजा सक्सेना
गंगा का घाट
नव संदेश लिए
उगा सूरज !
-अन्नदा पाटनी
गीले कपड़े
अलगनी पे पड़े
ताकते सूर्य
-चित्रा गुप्ता
गिरती बूँदें
सिमटीं धरती में
उठी सुगन्ध
-डॉ. अनिल सक्सेना
गया टूटता
रोशनी के भार से
क्रिसमस ट्री
-डॉ अनिल सक्सेना
गीत धीमे से
जब झींगुर गाये
रात सो जाये
-प्रीति गोविंदराज
गर्माया दिन
रेशम-सी लिपटी
बर्फीली रात
-विनीता तिवारी
घर-दफ्तर
यहीं पिता की यात्रा
चार धाम की
-डॉ नितीन उपाध्ये
गिरमिटिया
उम्मीद की किरण
गन्ने के खेत
-आशा मोर
त्रिनिदाद
गर्म अलाव
सुलगा रात भर
ज़रा सी राख
-शालिनी वर्मा
[दोहा ,कतर]
गर्मी की छुट्टी
हुड़दंग हो रहा
नानी के घर
-मनीष श्रीवास्तव
गंध बिखेर
रातरानी करती
प्रिय-प्रतीक्षा
-माया बंसल
गुज़र गये
अपने साथ ले कर
सुहाने दिन
-डॉ० दुर्गा सिन्हा’उदार'
गहन रात
चाँदनी-से शीतल
यादों के पल
-मीरा ठाकुर
गजरों सजी
इठलाती धरती
नई दुल्हन
-मानोशी चटर्जी
गर्म हवाएँ
खुली सड़क पर
बीन बजाएँ
-पूर्णिमा वर्मन
गुनगुनायी
हवाओं ने जो लोरी
बेटी मुस्काई
-शशि पाधा
गर्मी से हारी
बैठ गयी सुस्ताने
छाँव में हवा
-आलोक मिश्रा
गंगा का तट
बनारस की शाम
बैरागी मन
-आराधना झा श्रीवास्तव
गुआम रेल
बहेलिये की घात
पंख लाचारी
-चित्रा गुप्ता