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Wednesday, April 24, 2024

बनी अखाड़ा

बनी अखाड़ा 
राजनीतिक निष्ठा 
प्राण-प्रतिष्ठा 

    -अनिल सक्सेना ‘ज़ाहिर’

बैंच पे लेटी

बैंच पे लेटी 
बतिया रही हिम 
नीरवता से 

    -आरती लोकेश  

बिछी है बर्फ़

बिछी है बर्फ़
श्वांस को तरसती 
दूब बेचारी 

    -आलोक मिश्रा 

बर्फ़ देखने

बर्फ़ देखने
उतरे धरा पर
आज परिंदे

    -अरुन शर्मा

बदले चोला

बदले चोला 
तान श्वेत चादर 
धरा सुन्दरी

    -नितीन उपाध्ये

बर्फ़ ही बर्फ़

 बर्फ़ ही बर्फ़
अब धरती ने ली 
चैन की साँस

   -आलोक मिश्रा

बिछी हुई हैं

 बिछी हुई हैं
श्वेत नर्म चादरें 
पक्षी सिमटे 

    -रेणु चन्द्रा

बर्फ़ का डेरा

 बर्फ़ का डेरा
पार्क की बेंचों पर
बैठे तो कहा

     -आलोक मिश्रा

बर्फ़ की मार

बर्फ़ की मार
चिड़ियों पर भारी
भूखी बेचारी 

      -आलोक मिश्रा 

बर्फ से ढँकी

 बर्फ से ढँकी 
चिनार की वादियाँ 
सन्नाटा व्याप्त

    -रंजना झा

बर्फ ही बर्फ

बर्फ ही बर्फ 
है सुनसान रास्ता 
आगे मंजिल 

    -मीरा ठाकुर

बर्फ़ ने छीने

 बर्फ़ ने छीने
फल फूल  पत्ते 
वस्त्र वृक्षों के

    -अनिल सक्सेना ज़ाहिर

बर्फीली हवा

बर्फीली हवा
पर्ण विहीन पौधे
चट्टानें चीखें
-आरती परीख

बाढ़ ढूँढती

बाढ़ ढूँढती 
ग़रीबों के छप्पर 
बुलडोज़र
-अनिल सक्सेना ‘ज़ाहिर’

बाँसरी गूँजे

बाँसरी गूँजे
बह रही पवन
वृंदा के वन
-अमिता शाह-'अमी'

Wednesday, June 21, 2023

बरसीं यादें

बरसीं यादें
भीगता मन हुआ
मन भर का! 

-डॉ. शैलजा सक्सेना

बहता पानी

बहता पानी
दम्भ-द्वेष से परे
देता जीवन! 

-विनीता तिवारी

Saturday, June 03, 2023

बाल सूर्य से

बाल सूर्य से 
रात भर था कहाँ ?
पूछती उषा 

-डॉ. नितीन उपाध्ये 

Friday, June 02, 2023

बहती नदी

बहती नदी 
झेले पत्थर रोड़े 
राह न मोड़े 

-डा॰ अनिल सक्सेना ‘ज़ाहिर’

Thursday, May 18, 2023

बैसाखी हवा

बैसाखी हवा
सहरा में सजाती
रेत-रंगोली

-आरती परीख