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Wednesday, April 24, 2024

सार्थक शब्द

सार्थक शब्द 
दिशाएँ बदलते 
चोट करते

-दुर्गा सिन्हा उदार

शुद्धता पूर्ण

शुद्धता पूर्ण 
बर्फ़ीली है चादर 
जल-कण की 
-दुर्गा सिन्हा उदार  

शाम ढलती

शाम ढलती 
आगाह कर रही 
जीवन संध्या 
-दुर्गा सिन्हा ‘उदार

Thursday, June 08, 2023

भूलभुलैया

भुलभुलैया
निकलना कठिन
जीवन-चक्र 

-डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘उदार‘

Wednesday, April 19, 2023

फूल पत्तियाँ

फूल पत्तियाँ 
हिलमिल झूमते
बातें करते 

-डॉ० दुर्गा सिन्हा 'उदार'

Saturday, March 11, 2023

आपसी रंज

आपसी रंज 
सात जनम तक 
बढ़ाता दंश 

-डॉ० दुर्गा सिन्हा 'उदार'

हारते नहीं

हारते नहीं 
ढूँढ़ ही लेते हम 
हार में जीत 

-डॉ० दुर्गा सिन्हा 'उदार'

जोहतीं बाट

जोहतीं बाट 
दूर क्षितिज पर 
अम्मा की आँखें 

-डॉ० दुर्गा सिन्हा 'उदार'

ख़ुदगर्ज़ी ने

ख़ुदगर्ज़ी ने
मिलने नहीं दिया 
धरा-आकाश 

-डॉ० दुर्गा सिन्हा 'उदार'

Thursday, March 09, 2023

दूर होकर

दूर होकर 
आँकलन करते 
नज़दीकियाँ 

-डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘उदार 

चुराते रहे

चुराते रहे 
खुद से खुद को ही 
ताउम्र सभी 

-डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘उदार

कुहासा घना

कुहासा घना 
डूबता सा शहर 
घने वृक्ष भी 

-डॉ० दुर्गा सिन्हा  उदार

Wednesday, January 04, 2023

नव विहान

नव विहान 
फैला है नभ पर 
नव वितान 

डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘उदार'

Wednesday, November 23, 2022

बाल साहित्य

बाल साहित्य 
खुल जातीं परतें 
बाल मन की 

-डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘उदार'

Thursday, November 17, 2022

गुजर गये

गुज़र गये
अपने साथ ले कर
सुहाने दिन 

-डॉ० दुर्गा सिन्हा’उदार'

Saturday, November 12, 2022

ओस के कण

ओस के कण
बना देते सागर
मिल जो जाते

-डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘उदार'



दीप दान से

दीप दान से 
नदी जगमगाई 
उतरा सूर्य

-डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘उदार'

Friday, November 11, 2022

रामेश्वरम

रामेश्वरम
गीत गाते पत्थर
जुड़ते गए

-डॉ० दुर्गा सिन्हा उदार 

Thursday, November 10, 2022

बिछी कालीन

बिछी क़ालीन 
पतझड़ में पत्ते 
धरा सजाते

-डॉ० दुर्गा सिन्हा उदार

Friday, November 04, 2022

त्योहारी भोर

त्योहारी भोर
अलसाया आँगन
ऊँघता मन 

-डॉ० दुर्गा सिन्हा 'उदार'