प्रसूति गॄह
खिड़की के ऊपर
कबूतरों का
-चित्रा गुप्ता
साँझ की धूप
कहती अलविदा
चढ़ अटारी
-चित्रा गुप्ता
गीले कपड़े
अलगनी पे पड़े
ताकते सूर्य
-चित्रा गुप्ता
पीपल पात
डालियों पे झूमते
गले मिलते
-चित्रा गुप्ता
मछलियों का
बोनसाई संसार
एक्वेरियम
-चित्रा गुप्ता
दीपों की सेना
अमावस का चाँद
झाँके मेघों से
-चित्रा गुप्ता
सूखी शाखाएँ
वसंत को पुकारें
बाहें फैलाए
-चित्रा गुप्ता
खिड़की खोली
झोंका हवा का आया
धूल भी लाया
-चित्रा गुप्ता
भेजे बहिन
ईमेल पर राखी
सूनी कलाई
-चित्रा गुप्ता
हरी दूब में
ग्रीवा ताने हिरनी
प्रतीक्षारत
–चित्रा गुप्ता
वाणी के शर
भेदें भीतर तक
बनें दूरियाँ
–चित्रा गुप्ता
फागुनी धूप
मुखिया की चैपाल
बान की खाट
–चित्रा गुप्ता
पक्षी चहके
मुखरित सन्नाटा
वन ठहाका
–चित्रा गुप्ता
गुआम रेल
बहेलिये की घात
पंख लाचारी
-चित्रा गुप्ता