झरते फाहे
छुपे बैठे उकड़ूँ
ढके मकान
-मानोशी चटर्जी
सिंदूरी साज
कत्थई शामियाना
दुल्हन-शाम
-मानोशी चटर्जी
सफेद टोपी
दानव-सा पर्वत
हरा वदन
-मानोशी चटर्जी
श्वेत वसन
खेली सिंदूर रंग
जीवन नया
-मानोशी चटर्जी
मटकी फूटी
बह गया कंचन
रँगा जगत
-मानोशी चटर्जी
बादल तले
मेंढक की मंडली
जन्मों की बातें
-मानोशी चटर्जी
बिछा पलाश
फागुन बिखेरता
रंग गोधूली
-मानोशी चटर्जी
निस्तब्ध रात
शांत झरती बर्फ
काँपते ठूँठ
-मानोशी चटर्जी
फागुनी चाँद
चाँदनी उबटन
गोरा आसमां
-मानोशी चटर्जी
धूप थिरके
पीली चूनर ओढ़
फागुन संग
-मानोशी चटर्जी
डाल से टँगी
टपकी लो टपकी
झुलसी रोटी
-मानोशी चटर्जी
तेज कदम
जंगल या शहर
घिरती शाम
-मानोशी चटर्जी
झरते फाहे
छुपे बैठे उकड़ूँ
ढके मकान
-मानोशी चटर्जी
गजरों सजी
इठलाती धरती
नई दुल्हन
-मानोशी चटर्जी
चरखी घूमी
चिंगारियाँ छिटकीं
गगन सजा
-मानोशी चटर्जी
खेले सरसों
वासंती हवा संग
धरा लजाये
-मानोशी चटर्जी
ओढ़ कम्बल
धरती आसमान
फूट के रोये
-मानोशी चटर्जी
अधिक बातें
बेमतलब हँसी
उलझे रिश्ते
-मानोशी चटर्जी
ऊँचे चिनार
असहाय से खड़े
बर्फ से लदे
-मानोशी चटर्जी
झुका के सर
चुपचाप नहाए
शर्मीले पेड़
-मानोशी चटर्जी