धूप ने ओढ़ी
मटमैली ओढ़नी
धरा निराश
-शशि पाधा
देस-विदेश
पीपल के पत्तों में
घर की याद
-शशि पाधा
झरते पात
पतझड़ी आभास
सुस्ताई धूप
-शशि पाधा
मस्ती की चाल
केनेडियन गीज़
ट्रैफ़िक जाम
-शशि पाधा
मेलार्ड डक्स
करें अठखेलियाँ
झील निहाल
-शशि पाधा
प्रवासी पंछी
शाख़-शाख़ ढूँढ़ता
नया बसेरा
-शशि पाधा
हिरना-मन
बावरा-सा ढूँढ़ता
कस्तूरी सुख
-शशि पाधा
स्वप्न-पखेरू
मन की अटारी में
बुनते नीड़
-शशि पाधा
सदा बहार
रात भर झरता
हरसिंगार
-शशि पाधा
रिश्तों की डोर
उलझी, न सुलझी
छूटे थे छोर
-शशि पाधा
भेजी थी माँ ने
अनुभवों की गाँठ
डोली के संग
-शशि पाधा
भीनी बयार
रेशमी अहसास
क्या तुम पास
-शशि पाधा
बाँधे-समेटे
गुड़िया के सपने
सीपी के हार
-शशि पाधा
बाँध ले आया
मौसम हरकारा
धूप पिटारा
-शशि पाधा
बादल कहे
बाँध मन की डोरी
उड़ ले संग
-शशि पाधा
बंद तिजोरी
सूरज हाथ चाबी
भीतर धूप
-शशि पाधा
पेड़ खजूर
न झुके न जाने
छाँव का मोल
-शशि पाधा
पीहर आयी
घड़ी भर न बैठी
पराई धूप
-शशि पाधा
पराया देश
रोज़ मुँह चिढ़ाता
बेगाना चाँद
-शशि पाधा
दूर खो गयीं
मंदिर की घंटियाँ
शंख ध्वनियाँ
-शशि पाधा