अंतर्मन में
है निवास प्रभु का
अंदर झाँक
-अन्नदा पाटनी
ख़त्म न होता
हार जीत का क्रम
संघर्ष जारी
-अन्नदा पाटनी
गंगा का घाट
नव संदेश लिए
उगा सूरज !
-अन्नदा पाटनी
मुफ़्त में पायी
सस्ती नहीं ज़िंदगी
अनमोल है
-अन्नदा पाटनी
भरी उड़ान
पंखों चढ़ी उम्मीद
निराशा भागी
-अन्नदा पाटनी
शब्द जाकर
ढूँढ़ लाये भावों को
कविता बनी
-अन्नदा पाटनी
मन के खूँटे
यादों के गलियारे
टँगे हैं चित्र
-अन्नदा पाटनी
मिलें न मिलें
जोड़े रखता प्यार
भले दूर हों
-अन्नदा पाटनी
लुप्त चौपालें
हँसते-बतियाते
बुजुर्ग लोग
-अन्नदा पाटनी
ढलके आँसू
कोई देख न पाया
छुपी वेदना
-अन्नदा पाटनी
चंदा सूरज
गगन में रहते
आंख चुराएँ
-अन्नदा पाटनी
बरसी रात
दूब पर चमकी
मोती सी बूँदें
-अन्नदा पाटनी
लड़ी रात से
सूरज की ख़ातिर
भोर सुहानी
-अन्नदा पाटनी
भीषण गर्मी
त्रस्त धरा पुकारे
अंबर सुन
-अन्नदा पाटनी
प्रकृति गुरु
सबक़ सिखाती है
अनाचारी को
-अन्नदा पाटनी