धरा जागती
रवि के रथ पर
सोई किरणें
-राजेन्द्र सूरज
कमल सुप्त
है झील ध्यानमय
मूक चाँदनी
-राजेन्द्र सूरज
विरह राग
कलियों ने गाकर
बाग भिगोया
-राजेन्द्र सूरज
निशा गायिका
तारे लिये मृदंग
लापता चाँद
-राजेन्द्र सूरज
बादल बिके
हवाएँ खरीदार
तड़पे धरा
-राजेन्द्र सूरज