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Thursday, September 15, 2022

हौसला ज़िन्दा

हौसला ज़िन्दा
समंदर को लाँघे
नन्हा परिंदा
-कृष्णा वर्मा

हवा छिछोरी

हवा छिछोरी
छेड़े कली बेबस
सिहरी जाए
-कृष्णा वर्मा

हरी ओढ़नी

हरी ओढ़नी
रँगी कशीदाकारी
क्या फुलवारी
-कृष्णा वर्मा

लटक रही

लटक रही
पेड़ों पे कुहासे की
साँवली सौंर
-कृष्णा वर्मा

भोर ने ओढ़ा

भोर ने ओढ़ा
कोहरे का दुपट्टा
धूप नाराज़
-कृष्णा वर्मा

रोज जन्मती

रोज जन्मती
रात की कोख एक
नया सूरज
-कृष्णा वर्मा

पर्वत रोया

पर्वत रोया
दर्द जो पिघला तो
फूटा झरना
-कृष्णा वर्मा

पत्तों के कानों

पत्तों के कानों
हवा फुसफुसाए
लोक कथाएँ
-कृष्णा वर्मा

नदी जल में

नदी जल में
नहा के हवाएँ दें
सूर्य को अर्घ्य
-कृष्णा वर्मा

तोड़ती रही

तोड़ती रही
झरनों की पायल
घाटी का मौन
-कृष्णा वर्मा

थामे उजास

थामे उजास
पेड़ की फुनगी पे
लटका चाँद
-कृष्णा वर्मा

जन्मीं कोंपलें

जन्मीं कोंपलें
मतवाली शाखाएँ
सोहर गायें
-कृष्णा वर्मा

आँखों की नमी

आँखों की नमी
बंजर न होने दे
रिश्तों की जमीं
-कृष्णा वर्मा