बर्फ़ देखने
उतरे धरा पर
आज परिंदे
-अरुन शर्मा
पोस्टरों में है
मजदूर-दिवस
बाहर कहाँ !
-अरुन शर्मा
प्याऊ का पानी
बोतल बन्द हुआ
बिकने लगा
-अरुन शर्मा
वृक्ष चीड़ के
फाग में होली खेलें
पीले रंग से
-अरुन शर्मा
भूख लाचारी
इन शब्दों के आगे
कविता खत्म
-अरुन शर्मा
हो गये जवाँ
ज़रा चोट क्या लगी
याद आई माँ !
-अरुन शर्मा
नदी निर्मल
बिना भेदभाव के
देती है जल
-अरुन शर्मा
पानी का घड़ा
बोतलों में समाया
फ्रिज में सजा
-अरुन शर्मा
रिश्तों की लड़ी
पोते ने छुड़वा दी
दादा की छड़ी
-अरुन शर्मा
बच्चों में व्यस्त
परदेस आकर
दादा जी मस्त
-अरुन शर्मा
चाँद देखने
हज़ारों चाँद खड़े
आज छतों पे
-अरुन शर्मा
चुनावी घड़ी
लगी वादों की झड़ी
रोये झोंपड़ी
-अरुन शर्मा
लड़ता रहा
आँधियों से अकेला
नन्हा-सा दिया
-अरुन शर्मा
फूलों के लिए
बन के बॉडीगार्ड
काँटे तैनात
-अरुन शर्मा
पेड़ों की छाया
जाते जाते सूरज
साथ ले गया
-अरुन शर्मा
रास्ते की धूल
आंधियों के सहारे
सर पे चढ़े
-अरुन शर्मा
बारिश-धूप
झेलते शामियाने
हार न मानें
-अरुन शर्मा
वतन बेज़ार
सात समंदर पार
है रोजगार
-अरुन शर्मा
अग्निकुंड पे
बारिश का हमला
जूझती ज्वाला
-अरुन शर्मा