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Friday, September 23, 2022

पहने बैठी

पहने बैठी 
हीरे की नथुनी-सी
फूल पाँखुरी

-भावना कुँअर

सपनों-सा है

सपनों-सा है
ये दुनिया का मेला
मन अकेला

-भावना कुँअर

ढोल बजाते

ढोल बजाते
बैठ काले रथ पे
बादल आते

-भावना कुँअर

पेटू चिड़िया

पेटू चिड़िया
कुतर के ले गई
नन्हीं कलियाँ

-भावना कुँअर

रंग-पोटली

रंग-पोटली
हाथ से ज्यूँ फिसली
बनी तितली

-भावना कुँअर

सूखने लगे

सूखने लगे
खलिहानों के होंठ
बरसो मेघ! 

-भावना कुँअर

भीगी थी घास

भीगी थी घास
रोई ज्यों चुपके से
कल की रात

-भावना कुँअर

वर्षा जो आयी

वर्षा जो आयी
धूप के खरगोश
दूर जा छिपे
-भावना कुँअर

लेटी थी धूप

लेटी थी धूप
सागर तट पर
प्यास बुझाने
-भावना कुँअर

लिए बैठी है

लिए बैठी है
गुलाब की पाँखुरी
ओस की बूँद
-भावना कुँअर

भीगी पानी में

भीगी पानी में
चिड़िया की सहेली
सुखाए पंख
-भावना कुँअर

भागती आयी

भागती आयी
दुपट्टा गिरा कहीं
चंचल हवा
-भावना कुँअर

बड़ी ही व्यस्त

बड़ी ही व्यस्त
नन्ही सी गिलहरी
दाना पानी में
-भावना कुँअर

पगडण्डियाँ

पगडण्डियाँ
ठोकरें हैं सहतीं
मौन रहतीं
-भावना कुँअर

पागल हवा

पागल हवा
उड़ा कर ले आयी
यादों के खत
-भावना कुँअर

नन्ही चिरैया

नन्ही चिरैया
गुलमोहर पर
फुदकी फिरे
-भावना कुँअर

दौड़ लगायें

दौड़ लगायें
धूप के खरगोश
हाथ न आयें
-भावना कुँअर

शर्मायी लता

शर्मायी लता
ढूँढ़ती फिरे वस्त्र
पतझर में
-भावना कुँअर

सकुचाई सी

सकुचाई सी
लिपटती ही गई
लता पेड़ से
-भावना कुँअर

दुल्हन झील

दुल्हन झील
तारों की चूनर से
घूँघट काढ़े

-भावना कुँअर