पहने बैठी
हीरे की नथुनी-सी
फूल पाँखुरी
-भावना कुँअर
सपनों-सा है
ये दुनिया का मेला
मन अकेला
-भावना कुँअर
ढोल बजाते
बैठ काले रथ पे
बादल आते
-भावना कुँअर
पेटू चिड़िया
कुतर के ले गई
नन्हीं कलियाँ
-भावना कुँअर
रंग-पोटली
हाथ से ज्यूँ फिसली
बनी तितली
-भावना कुँअर
सूखने लगे
खलिहानों के होंठ
बरसो मेघ!
-भावना कुँअर
भीगी थी घास
रोई ज्यों चुपके से
कल की रात
-भावना कुँअर
वर्षा जो आयी
धूप के खरगोश
दूर जा छिपे
-भावना कुँअर
लेटी थी धूप
सागर तट पर
प्यास बुझाने
-भावना कुँअर
लिए बैठी है
गुलाब की पाँखुरी
ओस की बूँद
-भावना कुँअर
भीगी पानी में
चिड़िया की सहेली
सुखाए पंख
-भावना कुँअर
भागती आयी
दुपट्टा गिरा कहीं
चंचल हवा
-भावना कुँअर
बड़ी ही व्यस्त
नन्ही सी गिलहरी
दाना पानी में
-भावना कुँअर
पगडण्डियाँ
ठोकरें हैं सहतीं
मौन रहतीं
-भावना कुँअर
पागल हवा
उड़ा कर ले आयी
यादों के खत
-भावना कुँअर
नन्ही चिरैया
गुलमोहर पर
फुदकी फिरे
-भावना कुँअर
दौड़ लगायें
धूप के खरगोश
हाथ न आयें
-भावना कुँअर
शर्मायी लता
ढूँढ़ती फिरे वस्त्र
पतझर में
-भावना कुँअर
सकुचाई सी
लिपटती ही गई
लता पेड़ से
-भावना कुँअर
दुल्हन झील
तारों की चूनर से
घूँघट काढ़े
-भावना कुँअर