पहाड़ पिता
रोके चंचल हवा
बहकने से
-ममता मिश्रा
उड़ना सीखे
हुए पंछी प्रवासी
घोंसला ख़ाली
-ममता मिश्रा
सर्वत्र एक
पशु-पक्षी की बोली
एकता सूत्र
-ममता मिश्रा
लुप्त हो गये
पाषाण नगर में
प्रकृति-गान !
-ममता मिश्रा
(नीदरलैंड्स)
तीन बत्तखें
अपने मक़सद
अपनी राहें
-ममता मिश्रा
बूढ़ा है पेड़
छाल से झाँक रहे
अनेक किस्से
-ममता मिश्रा
तकती आँखें
पाठशाला का रास्ता
ड्रेस न बस्ता
-ममता मिश्रा
कानाफूसी में
तितली ने क्या कहा
फूल मुस्काया!
-ममता मिश्रा
खोजती रही
पौर वाली वे रातें
सूनी चैपाल
-ममता मिश्रा
अल्गोजा बजा
धुन पर थिरकें
हवा के बच्चे
-ममता मिश्रा
शहरी शादी
ठिठके पड़े रहे
बुआ के गीत
-ममता मिश्रा
घर-आँगन
मिट्टी से लीपती माँ
मिट्टी में मिली !
-ममता मिश्रा