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Wednesday, April 24, 2024
बिछी है बर्फ़
बिछी है बर्फ़
श्वांस को तरसती
दूब बेचारी
-आलोक मिश्रा
बर्फ़ ही बर्फ़
बर्फ़ ही बर्फ़
अब धरती ने ली
चैन की साँस
-आलोक मिश्रा
बर्फ़ का डेरा
बर्फ़
का
डेरा
पार्क
की
बेंचों
पर
बैठे
तो
कहा
-
आलोक
मिश्रा
बर्फ़ की मार
बर्फ़
की
मार
चिड़ियों
पर
भारी
भूखी
बेचारी
-
आलोक
मिश्रा
ज्यूँ बरगद
ज्यूँ
बरगद
संविधान
भी
देता
सभी
को
छाँव
।
-
आलोक
मिश्रा
संध्या बनाए
संध्या बनाए
हर शाम रंगोली
आसमान में
-आलोक मिश्रा
छाँव ना पानी
छाँव ना पानी
कहाँ जाए बेचारी
प्यासी गौरैया
-आलोक मिश्रा
ख़ुश मत हो
ख़ुश मत हो
मात्र पुतला जला
रावण नहीं
-आलोक मिश्रा
Sunday, May 14, 2023
सैलानी बढ़े
सैलानी बढ़े
पर्वतों के फेफड़े
दर्द से भरे
-आलोक मिश्रा
Sunday, April 23, 2023
हवा भेजती
हवा भेजती
विंड मिल के हाथों
भेंट में ऊर्जा
-आलोक मिश्रा
Thursday, March 09, 2023
रोको ना इन्हें
रोको ना इन्हें
ढूँढ़ ही लेंगी रास्ता
बेल-लताएँ
-आलोक मिश्रा
Sunday, January 22, 2023
रोबोट आये
रोबोट आये
इंसान कहाँ जायें
कमाने–खाने
-आलोक मिश्रा
दरके रिश्ते
दरके रिश्ते
ताल-मेल सीमेंट
भरे दरारें
-आलोक मिश्रा
दूरियाँ बढ़ीं
दूरियाँ बढ़ीं
पिता-पुत्र के बीच
सेतु बनी माँ
-आलोक मिश्रा
Tuesday, November 08, 2022
सिर पे बीज
सिर पे बीज
रखे हुए अंकुर
धरा से झाँके
-आलोक मिश्रा
Monday, November 07, 2022
रात बनाती
रात बनाती
ओस का शरबत
सूर्य के लिए
-आलोक मिश्रा
Thursday, November 03, 2022
अकेली बिल्ली
अकेली बिल्ली
रात भर न सोई
डर के मारे
-आलोक मिश्रा
Wednesday, November 02, 2022
निर्मोही मेघ
निर्मोही मेघ
प्यासी ही रह गयी
रेत बेचारी
-आलोक मिश्रा
Wednesday, September 14, 2022
बढ़ती गर्मी
बढ़ती गर्मी
रिश्तों में भी समाई
घटा घनत्व
-आलोक मिश्रा
Thursday, September 01, 2022
श्वेत बादल
श्वेत बादल
नीले थाल में रखे
रुई के फाहे
-आलोक मिश्रा
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