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Wednesday, April 24, 2024

बिछी हुई हैं

 बिछी हुई हैं
श्वेत नर्म चादरें 
पक्षी सिमटे 

    -रेणु चन्द्रा

Wednesday, November 02, 2022

बोया पीपल

बोया पीपल
देश याद आया
मन मुस्काया 

-रेणु चन्द्रा माथुर

Tuesday, November 01, 2022

नील गगन

नील गगन
बादलों का है डेरा
मन चितेरा 

-रेणु चन्द्रा माथुर

Thursday, September 22, 2022

आँसू कहते

आँसू कहते
अबोले रह कर
मन की बात

-रेणु चन्द्रा माथुर



चुप हैं रिश्ते

चुप हैं रिश्ते
साथ मेरे थे कभी
मौन पसरा

-रेणु चन्द्रा माथुर



जलते पाँव

जलते पाँव
तपती है डगर
दूर है गाँव

-रेणु चन्द्रा माथुर

Monday, September 19, 2022

रंग बदल

रंग बदल
मँडराती फूलों पर 
हमिंग बर्ड 

-रेणु चन्द्रा माथुर

Thursday, September 08, 2022

भोर हुयी तो

भोर हुई  तो
सड़क दौड़ पड़ी
चिन्ता लेकर 

-रेणु चन्द्रा माथुर

Sunday, August 28, 2022

याद आती है

याद आती है
माँ के हाथ की रोटी
परदेस में
-रेणु चन्द्रा माथुर 

साँझ ढलते

साँझ ढलते
साँझा चूल्हा जलता
मेरे आँगन
-रेणु चन्द्रा माथुर 

साँझ की बेला

साँझ की बेला
देहरी पर जला
आस का दीया

-रेणु चन्द्रा माथुर 

शाख से टूटे

शाख से टूटे
फिर बिछुड़ जाते
ये पीले पत्ते
-रेणु चन्द्रा माथुर 

यादों के पाँखी

यादों के पाँखी
मन–नदी किनारे
अक्सर डोलें

-रेणु चन्द्रा माथुर 

भोर हो गयी

भोर हो गयी
प्रेमगीत सुनाती
नन्ही चिड़िया
-रेणु चन्द्रा माथुर 

धरा ने ओढ़ा

धरा ने ओढ़ा
कोहरे का कम्बल
काँपता मन
-रेणु चन्द्रा माथुर 

थकी-सी भोर

थकी-सी भोर
अलसायी पसरी
हरी दूब पे
-रेणु चन्द्रा माथुर 

खिचीं दीवारें

खिचीं दीवारें
हो गये बँटवारे
कुछ न बचा
-रेणु चन्द्रा माथुर 

Tuesday, August 23, 2022

अँधेरी रात

अँधेरी रात
बेखौफ घूमती है
हवा आवारा
-रेणु चन्द्रा माथुर