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Thursday, February 16, 2023

महत्वाकांक्षा

महत्वाकांक्षा 
खिंचती जाती डोर 
कटी पतंग

-आराधना झा श्रीवास्तव

रोटी की भूख

रोटी की भूख
चुकाती रहती है
जीने का मोल

-आराधना झा श्रीवास्तव 

Thursday, October 06, 2022

लहरें लेतीं

लहरें लेतीं
तट पर आकर 
रेत समाधि

-आराधना झा श्रीवास्तव

Thursday, September 01, 2022

लाँघते सीमा

लाँघते सीमा
ढूँढते रोज़गार 
हम प्रवासी!
-आराधना झा श्रीवास्तव

कुम्हलाई-सी

कुम्हलाई-सी
गमले में ढूँढ़ती
अपना घर
-आराधना झा श्रीवास्तव

बर्फ़ का बोझ

बर्फ़ का बोझ 
विदा हुआ बसंत 
मौन हवेली 

-आराधना झा श्रीवास्तव

Thursday, August 25, 2022

लहरें लेतीं

लहरें लेतीं
तट पर आकर 
रेत समाधि!

-आराधना झा श्रीवास्तव

सँभाले हुए

सँभाले हुए
गृहस्थी गोवर्धन
कृष्ण से पिता
-आराधना झा श्रीवास्तव

गंगा का तट

गंगा का तट
बनारस की शाम
बैरागी मन
-आराधना झा श्रीवास्तव

नीली डोली में

नीली डोली में
विदा होती धरती
क्षितिज पर
-आराधना झा श्रीवास्तव

कानों में डाले

कानों में डाले
सुवासित झुमके
लजाती डाली
-आराधना झा श्रीवास्तव

अहं की छौंक

अहं की छौंक 
बिगाड़ती ज़ायक़ा 
बेस्वाद रिश्ते
-आराधना झा श्रीवास्तव

रोया पहाड़

रोया पहाड़ 
फूट पड़ा सैलाब 
हम भी रोये

-आराधना झा श्रीवास्तव

Tuesday, August 23, 2022

अँजुरी भर

अँजुरी भर
मायके का दुलार
माँ का खोंइचा
-आराधना झा श्रीवास्तव


Saturday, August 20, 2022

प्रवासी आत्मा

प्रवासी आत्मा
देह में तलाशती
अपना घर

-आराधना झा श्रीवास्तव

वृत्त में कैद

वृत्त में क़ैद 
गोल गोल घूमती 
धूरी बनी माँ !

-आराधना झा श्रीवास्तव

किसने खायी

किसने खायी ?
चाँद की आधी रोटी 
बादल मौन!

-आराधना झा श्रीवास्तव

कैसे ढूँढोगे


कैसे ढूँढोगे?
झूठ के सागर में 
बूँद-सा सच !

-आराधना झा श्रीवास्तव