Showing posts with label *विनीता तिवारी. Show all posts
Showing posts with label *विनीता तिवारी. Show all posts

Wednesday, June 21, 2023

देश-देश में

देश-देश में
ढूँढ रहा ख़ुद को
प्रवासी मन! 

-विनीता तिवारी

बहता पानी

बहता पानी
दम्भ-द्वेष से परे
देता जीवन! 

-विनीता तिवारी

प्रेम-उन्माद

प्रेम-उन्माद
बहा लाया नदी को
सिन्धु किनारे! 

-विनीता तिवारी

नदी किनारे

नदी किनारे
पनपीं सभ्यताएँ
रचीं ऋचाएँ

-विनीता तिवारी

त्वचा बेहाल

त्वचा बेहाल
रसायनों से लाल
कैसा गुलाल

-विनीता तिवारी

अकेली धरा

अकेली धरा
झेल रही कब से
विकास क्रम

-विनीता तिवारी

समृद्ध देश

समृद्ध देश 
कुंठा फिर भी शेष
श्वेत-अश्वेत

-विनीता तिवारी

Wednesday, February 08, 2023

गर्माया दिन

गर्माया दिन 
रेशम-सी लिपटी 
बर्फीली रात

-विनीता तिवारी 

Wednesday, January 04, 2023

चली ज़बान

चली ज़बान 
कैंची सी कच-कच
उधड़े रिश्ते 

-विनीता तिवारी 
अमेरिका

Saturday, September 03, 2022

झूठ पाखण्ड

झूठ पाखण्ड
डुबकी लगाकर
हुए पावन

-विनीता तिवारी

Wednesday, August 31, 2022

बिकते रहे

बिकते रहे 
स्वर्णिम लिफ़ाफ़ों में 
मानव-मूल्य 

-विनीता तिवारी

Tuesday, August 30, 2022

रिश्तों की जमीं

रिश्तों की जमीं
बिना प्यार विश्वास
रही उजाड़
-विनीता तिवारी

परिवर्तन

परिवर्तन
प्रकृति का नियम
आसक्ति कैसी
-विनीता तिवारी

Tuesday, August 23, 2022

बहती नदी

बहती नदी
बहा लायी यादों का
अस्थि कलश

-विनीता तिवारी

जनजीवन

जनजीवन 
आस्था की बलि चढ़ा
रोयी नदी भी

-विनीता तिवारी

कहाँ सम्भव!

कहाँ सम्भव! 
दायरों में रहते 
ऊँची उड़ान 
-विनीता तिवारी

Sunday, August 21, 2022

अहम मेरा

अहम मेरा
जागा रहा हमेशा 
सोती रही मैं

-विनीता तिवारी