भूखा बालक
कातर-सी निगाहें
दोषी जगत
-शालिनी वर्मा
कटे जंगल
बिकती ऑक्सीजन
मुश्किल घड़ी
-शालिनी वर्मा
गर्म अलाव
सुलगा रात भर
ज़रा सी राख
-शालिनी वर्मा
[दोहा ,कतर]
पूरा समुद्र
रहता दो आँखों में
ख़ुश्क ज़िंदगी
-शालिनी वर्मा
पैरों का खेल
ज़माना हुआ जमा
देखने फ़ीफ़ा
-शालिनी वर्मा
झरती बूँदें
रंगीन मफ़लर
थमाती रश्मि
-शालिनी वर्मा
नन्हें से पंख
नाप लेती आकाश
छोटी चिड़िया
-शालिनी वर्मा
रात के आँसू
ओस बन सुनाते
कई कथाएँ
-शालिनी वर्मा
शीत ऋतु में
फ़र की शॉल ओढ़े
दुबकी बिल्ली
-शालिनी वर्मा
साक्ष्य दिखाते
प्राचीन शिलालेख
-शालिनी वर्मा
पानी के छींटे
मेघ खोलें ढक्कन
हर्षित जन
-शालिनी वर्मा
रुई के फाहे
बिखरे हैं नभ में
खेलें शशक
-शालिनी वर्मा
बेबस स्त्री
अधिकार के प्रश्न
निःशब्द जग
-शालिनी वर्मा
उग आये हैं
यहाँ- वहाँ पल्लव
धरा के शिशु
-शालिनी वर्मा