पिता चट्टान
अनिश्चितता दूर
पथ सुगम
-नीलू गुप्ता
सागर भरें
गागर के भीतर
ये मुहावरे!
-नीलू गुप्ता
आजादी क्या है ?
संविधान से बँधी
पतंग–डोरी
-नीलू गुप्ता
अपनी बोली
माँ की याद दिलाये
माँ जैसी लगे
-नीलू गुप्ता
शान्ति संदेश
दुन्दुभी बजा देती
मृदु–पवन
–नीलू गुप्ता
रिश्ते हमारे
उधड़ने लगते
माँ सिल देती
-नीलू गुप्ता