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Saturday, March 11, 2023

चक्कर ही है

चक्कर ही है 
देश या परदेश
दो रोटी का

-मंजू कुमार 

Wednesday, February 08, 2023

दिन कटे हैं

दिन कटे हैं
नहीं कटती शामें
ये अकेलापन

-मंजू कुमार 

Tuesday, January 24, 2023

परदेस में

परदेस में 
पहरावा बदला 
संस्कार नहीं

-मंजू कुमार

Sunday, January 22, 2023

बढ़ती उम्र

बढ़ती उम्र
याद आयें बहुत 
अपने लोग

-मंजू कुमार

पानी में देखा

पानी में दिखा
अपना प्रतिबिम्ब
लगा मॉ का है

-मंजू कुमार

Tuesday, November 22, 2022

कोरल रीफ़

कोरल रीफ़
लुकाछुपी खेलती
नन्ही मछली 

-मंजू कुमार

Sunday, November 13, 2022

पक्षी ढूँढ़ते

पक्षी ढूँढ़ते
बाढ़ में बह गये
अपने नीड़

-मंजू कुमार

Friday, November 11, 2022

साँझ की बेला

साँझ की बेला
आकाश का केन्वस
पंछी चितेरे

-मंजू कुमार

Thursday, November 03, 2022

परदेश में

परदेश में
अपना सा लगता
पीपल-पेड़

-मंजू कुमार

Sunday, September 18, 2022

परदेश में

परदेश में
पराये हुए प्रिय
छूटे अपने 

-मंजू कुमार

Thursday, September 15, 2022

तेज हवाएँ

तेज हवाएँ
ले उड़ीं बादलों को
धरती प्यासी

-मंजू कुमार

Wednesday, September 14, 2022

पुराने घर

पुराने घर
बारिश का मौसम 
रिसती छतें

-मंजू कुमार

Tuesday, September 06, 2022

ताड़ के पेड़

ताड़ के पेड़ 
खोज रहीं चिड़ियाँ
फलों के गुच्छे

-मंजू कुमार

Tuesday, August 30, 2022

सागर तट

सागर तट
दो पैरों के निशान 
अकथ कथा

-मंजू कुमार

Tuesday, August 23, 2022

चाँदनी रात

चाँदनी रात
सागर का किनारा
हाथ पकड़े
-मंजू कुमार