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Wednesday, April 24, 2024

झील छुपी है

झील छुपी है 
नैनों की नगरी में 
पानी है खारा 
-अनिल सक्सेना ‘ज़ाहिर’

Thursday, March 09, 2023

झरते फाहे

झरते फाहे
छुपे बैठे उकड़ूँ 
ढके मकान

-मानोशी चटर्जी

झुंड में पक्षी

झुंड में पक्षी 
लाँघ जाते सागर 
एक होकर 

-डॉ. आरती लोकेश

Thursday, December 08, 2022

झुकतीं शाखें

झुकतीं शाखें 
ऊँची उठ आकाश 
वीपिंग विल्लो

-पूजा अनिल
 [स्पेन]

[वीपिंग विल्लो पेड़ मैंने मद्रिद में पार्क में देखे हैं जो ऊँचे एवम् बेहद आकर्षक होते हैं। ये हरे तथा घने वृक्ष अकसर पानी के किनारे होते हैं। ऐसा लगता है जैसे वे झुक कर अपनी सुन्दर परछाईं देख रहे हों।]



Tuesday, November 15, 2022

झरती बूँदें

झरती बूँदें
रंगीन मफ़लर
थमाती रश्मि 

-शालिनी वर्मा 

Tuesday, November 01, 2022

अनिता कपूर


झरे बादल 
गगन से धरती 
बने चूनर 

-अनिता कपूर

Tuesday, September 20, 2022

झरते पात

झरते पात
पतझड़ी आभास 
सुस्ताई धूप 

-शशि पाधा 

Wednesday, September 14, 2022

झरना स्वच्छ

झरना स्वच्छ
प्रकृति की ही देन
जीवन दाता!
-नागेश भोजने

Friday, September 09, 2022

झरते फाहे

झरते फाहे
छुपे बैठे उकड़ूँ 
ढके मकान
-मानोशी चटर्जी

Saturday, September 03, 2022

झूठ पाखण्ड

झूठ पाखण्ड
डुबकी लगाकर
हुए पावन

-विनीता तिवारी

Thursday, September 01, 2022

झूमते रहे

झूमते रहे 
हवा के संग संग 
रस्सी पे वस्त्र
-उमेश मौर्य

झाड़ी के पीछे

झाड़ी के पीछे 
छुपकर बैठता 
साँझ का सूर्य
-उमेश मौर्य

Tuesday, August 23, 2022

झूमतीं गातीं

झूमतीं गातीं
उड़तीं इठलातीं
यादें तितली
-मंजु मिश्रा





Sunday, August 21, 2022

झुका के सर

झुका के सर
चुपचाप नहाए
शर्मीले पेड़
-मानोशी चटर्जी

Saturday, August 20, 2022

झुग्गी झोपड़ी

झुग्गी झोपड़ी
कमर तक पानी
यही कहानी 

-माया बंसल