ताड़ झरते
सूक्ष्म-श्वेत सुमन
रची अल्पना
-पूर्णिमा वर्मन
नीम उदासी
गरमी का मौसम
धरती प्यासी
–पूर्णिमा वर्मन
धूप जाँचती
ऋतुओं की शाला में
जाड़े की कापी
-पूर्णिमा वर्मन
दौड़ अजानी
भीड़ अपरिचित
महानगर
–पूर्णिमा वर्मन
जेठ पधारे
खिले गुलमोहर
हैं वारे न्यारे
-पूर्णिमा वर्मन
चिड़िया प्यासी
घर की छत पर
फैली उदासी
-पूर्णिमा वर्मन
घनी उदासी
बस्ता वर्दी टिफिन
स्कूल का दिन
-पूर्णिमा वर्मन
गर्म हवाएँ
खुली सड़क पर
बीन बजाएँ
-पूर्णिमा वर्मन
एक ही ठाँव
खाड़ी की दोपहर
ताड़ों की छाँव
-पूर्णिमा वर्मन
कोयल घोले
कुहुक-कुहुक के
टोना वन में
-पूर्णिमा वर्मन
कहीं नहीं था
गरम नगर में
छाँह का डेरा
-पूर्णिमा वर्मन