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Sunday, November 26, 2023

लम्बे छोटे से

लम्बे छोटे से
रास्ते जीवन भर
साथ चलना

-अंजू घरभरन

लगी है झड़ी

लगी है झड़ी
आये वो याद मुझे
खनके चू़ड़ी

-अंजू घरभरन

Sunday, July 30, 2023

लौटातीं साँसें

लौटातीं साँसें
कुम्हलाए पत्तों में 
वर्षा की बूँदें
          -मंजु मिश्रा

Thursday, March 09, 2023

लय में बँधी

लय में बँधी
घुँघरू कलकल
नर्तकी नदी

-प्रीति गोविंदराज

Sunday, January 22, 2023

लुप्त चौपालें

लुप्त चौपालें
हँसते-बतियाते
बुजुर्ग लोग

-अन्नदा पाटनी 

Friday, January 13, 2023

लड़ी रात से

लड़ी रात से
सूरज की ख़ातिर 
भोर सुहानी

-अन्नदा पाटनी

Wednesday, January 04, 2023

लाँघना चाहे

लाँघना चाहे
कोहरे का दरिया
सूरज-गेंद

-अमिता शाह अमी

Friday, December 16, 2022

लुप्त हो गये

लुप्त हो गये
पाषाण नगर में 
प्रकृति-गान !

-ममता मिश्रा 
(नीदरलैंड्स) 

Thursday, October 06, 2022

लहरें लेतीं

लहरें लेतीं
तट पर आकर 
रेत समाधि

-आराधना झा श्रीवास्तव

Friday, September 23, 2022

लेटी थी धूप

लेटी थी धूप
सागर तट पर
प्यास बुझाने
-भावना कुँअर

लिए बैठी है

लिए बैठी है
गुलाब की पाँखुरी
ओस की बूँद
-भावना कुँअर

Friday, September 16, 2022

लड़ता रहा

लड़ता रहा
आँधियों से अकेला
नन्हा-सा दिया

-अरुन शर्मा 

Thursday, September 15, 2022

लटक रही

लटक रही
पेड़ों पे कुहासे की
साँवली सौंर
-कृष्णा वर्मा

Thursday, September 01, 2022

लाँघते सीमा

लाँघते सीमा
ढूँढते रोज़गार 
हम प्रवासी!
-आराधना झा श्रीवास्तव

Thursday, August 25, 2022

लहरें लेतीं

लहरें लेतीं
तट पर आकर 
रेत समाधि!

-आराधना झा श्रीवास्तव

Friday, August 19, 2022

लटका चाँद

लटका चाँद
धरती पर बोये
चाँदनी बीज

-डा० अनिता कपूर