मधुर रिश्ते
पेड़ों पर मनौती
बाँधती स्त्रियाँ
-उमेश मौर्य
भागती फिरें
सिगरेट फूँकती
रेलगाड़ियाँ
-उमेश मौर्य
बैल हाँकते
बतियाते बुजुर्ग
पकता गुड़
-उमेश मौर्य
बुनता रहा
सुरक्षा का स्वेटर
रेशमी कीड़ा
-उमेश मौर्य
बाँचती रहीं
कोने में मकड़ियाँ
वेद-पुरान
-उमेश मौर्य
बर्फ के फूल
सजाये सिर पर
खड़ी कपास
-उमेश मौर्य
बया का स्वर
प्यानों में ढूँढ़ रहा
बूढ़ा वादक
-उमेश मौर्य
पड़ी फुहार
आत्मदाह करते
कीट-पतंगे
-उमेश मौर्य
फूटा गुब्बारा
हवा में मिल गईं
हवा की साँसें
-उमेश मौर्य
नीला आकाश
उड़ती मछलियाँ
हवाई यान
-उमेश मौर्य
देश-विदेश
घूमता रहा कोरोना
सूनी सड़कें
-उमेश मौर्य
नयी कोपलें
पक्षियों के स्वर से
गूँजता वन
-उमेश मौर्य
डूबता गाँव
पोथी में पंडित जी
ढूँढ़ते हल
-उमेश मौर्य
डूबता सूर्य
कतारबद्ध पंक्षी
लौटते घर
-उमेश मौर्य
ठंड का डर
सिमट कर बैठा
बोतल में घी
-उमेश मौर्य
झूमते रहे
हवा के संग संग
रस्सी पे वस्त्र
-उमेश मौर्य
झाड़ी के पीछे
छुपकर बैठता
साँझ का सूर्य
-उमेश मौर्य
छोटा तालाब
बत्तख परिवार
रुई के फाहे
–उमेश मौर्य
छँटा कुहासा
खिड़कियों पे वस्त्र
फैलाती स्त्रियाँ
–उमेश मौर्य
चहके पंक्षी
प्रकृति का संगीत
गूँजता वन
–उमेश मौर्य