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Wednesday, April 24, 2024
चली बयार
चली
बयार
खिलखिलाए
फूल
लजाई
कली
-
अनिल
सक्सेना
‘
ज़ाहिर
’
चूहे खा गए
चूहे
खा
गए
पर
जी
भर
जिए
आटे
के
दिये
-
अनिल
सक्सेना
‘
ज़ाहिर
’
चिपकी यादें
चिपकी यादें
पुरानी हवेली की
भूत-सी आतीं
-माया बंसल
Friday, January 19, 2024
चूहे खा गए
चूहे खा गए
पर जी भर जिए
आटे के दिये
-डा॰ अनिल सक्सेना ‘ज़ाहिर’
Wednesday, August 09, 2023
चाँद को टाँगा
चाँद को टाँगा
बनाकर कंडील
आसमान ने
-मधु शर्मा
(न्यूयार्क)
Thursday, July 06, 2023
चलीं चीटियाँ
चलीं चीटियाँ
सिर पे लादे अन्न
वर्षा से खिन्न
-डा॰ अनिल सक्सेना ‘ज़ाहिर’
Wednesday, April 19, 2023
चली जो आँधी
चली जो आँधी
बिठा दिया धूल को
आकाश पर!
-डॉ. अनिल सक्सेना
Saturday, March 11, 2023
चक्कर ही है
चक्कर ही है
देश या परदेश
दो रोटी का
-मंजू कुमार
Thursday, March 09, 2023
चुराते रहे
चुराते रहे
खुद से खुद को ही
ताउम्र सभी
-डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘उदार
Wednesday, February 08, 2023
चाँद का टीका
चाँद का टीका
पूर्णमासी की रात
सजा गगन
-आशा मोर
Sunday, January 22, 2023
चार साड़ियाँ
चार साड़ियाँ
सहेजती रहीं माँ
सारी उमर
-डॉ नितीन उपाध्ये
चंदा सूरज
चंदा सूरज
गगन में रहते
आंख चुराएँ
-अन्नदा पाटनी
Wednesday, January 04, 2023
चली ज़बान
चली ज़बान
कैंची सी कच-कच
उधड़े रिश्ते
-विनीता तिवारी
अमेरिका
Friday, December 16, 2022
चैन से सोयी
चैन से सोयी
शरद के बहाने
जवाकुसुम
-रंजना झा
Wednesday, December 07, 2022
चैन से सोयी
चैन से सोयी
शरद के बहाने
जवाकुसुम
-रंजना झा
Monday, December 05, 2022
चुरा ले गया
चुरा ले गया
काले घने से बाल
वक़्त लुटेरा
-आरती पारीख
Thursday, November 03, 2022
चींटीं चलतीं
चींटीं चलतीं
कतार बनाकर
पूरी मिलिट्री
-शीतल जैन
Sunday, October 16, 2022
चौथ चाँद में
चौथ-चाँद में,
चौदहवीं का चाँद,
देखती चाँद
-डॉ. अनुराग मिश्रा
Friday, October 14, 2022
चाँद देखने
चाँद देखने
हज़ारों चाँद खड़े
आज छतों पे
-अरुन शर्मा
Sunday, October 09, 2022
चंचल मन
चंचल मन
उलझता रहता
जीव-जगत
-डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘उदार’
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