पीपल पेड़,
विदेशी धरा पर
स्मृति में देश
-डॉ अनुराग मिश्रा
प्रवासी सदा
विदेश में ढूँढ़ता
नन्हा भारत
-डॉ. अनुराग मिश्रा
स्वदेश बसा
रूह में ऐसे ज्यूँ
पुष्प में गंध
-डॉ. अनुराग मिश्रा
अंबर झाँके,
धरा का सौंदर्य,
द्रुम पट से
-डॉ अनुराग मिश्रा
चौथ-चाँद में,
चौदहवीं का चाँद,
देखती चाँद
-डॉ. अनुराग मिश्रा
अहिंसा, प्रेम,
सत्य, लाठी, खादी,
दे दी आज़ादी!
-अनुराग मिश्रा
तोतली ज़ुबाँ
कह जातीं अक्सर
निपट सच
-डा० अनुराग मिश्रा