यह भी खूब
आँधी व तूफ़ान से
जीतती दूब
-अनिल सक्सेना ‘ज़ाहिर’
याद-बारिश
भीगता मन हुआ
मन भर का
-शैलजा सक्सेना
युद्ध पे चिंता
कर रहे व्यापारी
कारतूसों के
-डॉ. नितीन उपाध्ये
याद संजोए
आँगन का पीपल
मेरे देश की
-स्नेहा देव
यादें पुरानी
घर के पीपल की
छोटे रूप में
-आशीष सिरसाव
यादों के फूल
खिल उठते जब
महके मन
-निर्मल सिद्धू
यूँ पहचान
ख़ुद अन्दर झाँक
रब को जान
-डा. रेशमा हिंगोरानी
याद पेड़ की
चुनमुन चिरैया
फुर्र हो गयी
-मंजु मिश्रा
याद आती है
माँ के हाथ की रोटी
परदेस में
-रेणु चन्द्रा माथुर
यादों के पाँखी
मन–नदी किनारे
अक्सर डोलें
-रेणु चन्द्रा माथुर
यादों के खत
भटकते पहुँचे
बरसों बाद
-डा0 अनिता कपूर