पेड़ की जड़ें
माटी भीतर सींचें
जीवन-डोर
-अर्बुदा ओहरी
रुई के फाहे
बादलों पर छाये
वृक्ष नहाये
-अर्बुदा ओहरी
प्रीत सँवारे
पेड़ के कोटर में
निर्मित नीड़
-अर्बुदा ओहरी
खड़े हैं शान्त
जंगल में तैनात
चीड़ के पेड़
–अर्बुदा ओहरी
ढलती साँझ
नीड़ की तलाश में
भटके पंछी
-अर्बुदा ओहरी
उड़ जायेगा
तोड़ सब बंधन
ये अन्तर्मन
-अर्बुदा ओहरी
अँधेरा नहीं
उजाला डराता है
चोर मन को
–अर्बुदा ओहरी