लौटातीं साँसें
कुम्हलाए पत्तों में
वर्षा की बूँदें
-मंजु मिश्रा
माँ के सपने
बिटिया की आँखों में
जाएँगे स्कूल
-मंजु मिश्रा
दे तो दूँ तुम्हे
मेरी आँखों के ख़्वाब
रखोगे कहाँ
-मंजु मिश्रा
सूखे फूल-सी
निकलीं किताबों में
पुरानी यादें
-मंजु मिश्रा
हौसलों से ही
हारती हैं मुश्किलें
भूलना मत
-मंजु मिश्रा
सुख न रहा
न दुख ही रहेगा
सदा के लिए
-मंजु मिश्रा
सर्द रातों में
ओढ़ लेती है हवा
बर्फ ही बर्फ
-मंजु मिश्रा
याद पेड़ की
चुनमुन चिरैया
फुर्र हो गयी
-मंजु मिश्रा
मुट्ठी में बाँधे
जीवन का सारांश
प्यारी बिटिया
-मंजु मिश्रा
मुट्ठी बंद की
यादें समेटने को,
हवा हो गयीं
-मंजु मिश्रा
मन मोहते
बर्फ़ से ढँके पेड़
जीना कठिन
-मंजु मिश्रा
भारी पड़ती
हजार शिकवों पे
एक ख़ामोशी
-मंजु मिश्रा
भरे पेट को
सूझता है रोमांस
चाँद के साथ
-मंजु मिश्रा
पूल में कूदी
नटखट चिड़िया
जून की गर्मी
-मंजु मिश्रा
पारा हो गयी
नदी पिघल कर
चाँद के साथ
-मंजु मिश्रा
नैनों की झील
सपनों की नौकाएँ
तिरती रहीं
-मंजु मिश्रा
तितलियों ने
वासंती ख़त लिखें
मौसम के नाम
–मंजु मिश्रा
तितलियों ने
छेड़ दिया ज़रा सा
हँसे गुलाब
-मंजु मिश्रा
तरु तन से
खींच ली चुनरिया
सिसकी धरा
-मंजु मिश्रा
तन प्रवासी
साँसें ढूँढ़ती रहीं
माटी की खुश्बू
-मंजु मिश्रा