बौना सन्नाटा
चटके इश्तहार
फिल्म की रील
-रजनी भार्गव
पतझड़ में
पत्ते गिरे तरु से
मैंने पहने
-रजनी भार्गव
भोजपत्र पे
रचे थे महाकाव्य
आज भी जिंदा
-रजनी भार्गव
बरसा मेह
टीन का खपरैल
चाय का ढाबा
-रजनी भार्गव
पुराने पन्ने
सतपुड़ा के वन
उजड़ी कथा
-रजनी भार्गव
पुरानी मिल
धूप लिखती किस्से
बिखरे शीशे
-रजनी भार्गव
पुराना पत्ता
क्रिस्मस पोस्टकार्ड
बर्फीली हवा
-रजनी भार्गव
पीली पत्तियाँ
शरद की तूलिका
ढलते रंग
-रजनी भार्गव
पिघली बर्फ
बूँद बन के गिरी
दूब मुस्काई
-रजनी भार्गव
पहली बर्फ
घर का पिछवाड़ा
भीगा बस्ता
-रजनी भार्गव
टूटे कँगूरे
बूँदों से भरा थाल
शिव मंदिर
-रजनी भार्गव
घना कोहरा
बसा कोने–कोने में
लाओ धूप को
-रजनी भार्गव
गरजे मेघ
कानाफूसी करते
ऊँचे शीशम
-रजनी भार्गव
नन्ही मछली
पोखर है हाथ में
जमी है काई
-रजनी भार्गव
धूप की फाँक
फ़राश की पत्तियाँ
कुतरी भोर
-रजनी भार्गव