हवा महल
रानियाँ पर्दानशीं
आधी आज़ादी!
-शार्दुला नोगजा
हरी पत्तियाँ
देखतीं सूरज को
सुबह होते
-शार्दुला नोगजा
स्वर्ण से लदे
छटपटाते बुद्ध
यही सिखाया ?
-शार्दुला नोगजा
हद में काशी
अनहद प्रकाशी
शिव आकाशी
-शार्दुला नोगजा
स्कूल के संग
बन गई दबंग
नन्ही मछली
-शार्दुला नोगजा
बड़े कठिन
सौंदर्य मापदंड के
दुखी बच्चियाँ
-शार्दुला नोगजा
नन्ही हथेली
सकुचाते खोलती
नर्म कोंपल
-शार्दुला नोगजा
दु:ख के झुंड
जीवन का जंगल
सुख अकेला
-शार्दुला नोगजा
दमन चक्र
सदियों से चलता
चलाता कौन ?
-शार्दुला नोगजा
काली बदली
मायके को लौटती
धरा की बेटी
-शार्दुला नोगजा
कलियाँ फूटीं
गुलाब का बगीचा
सोहर गाता
-शार्दुला नोगजा
अंकुर फूटा
मिट्टी, उमस बीच
उम्मीद बँधी
-शार्दुला नोगजा