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Thursday, September 29, 2022

सागर चाहे

सागर चाहे
मिलना बादलों से 
उठे, गिरे भी

-सुनीता पाहूजा

जब भी खिलें

जब भी खिलें
हर दु:ख लें हर
गुलमोहर 

-सुनीता पाहूजा

रात अँधेरी

रात अँधेरी
चाँद डटा अकेला
पथ का दीप

-सुनीता पाहूजा

प्रेम की यात्रा

प्रेम की यात्रा
होती देह से परे 
नेह की प्यासी

-सुनीता पाहूजा

भाषा-संस्कृति

भाषा-संस्कृति
संस्कारों की है खान 
भारत देश

-सुनीता पाहूजा

निज भाषा ही

निज भाषा ही
बढ़ाती है विश्व में
हमारी शान

-सुनीता पाहूजा

नदी बताती

नदी बताती
महत्व प्रकृति का
सुनो तो सही! 

-सुनीता पाहूजा

जीवन देती

जीवन देती
पालती है सृष्टि को
माँ-सी नदी

-सुनीता पाहूजा

शीतल रखे

शीतल रखे
पत्थरों को भी
नदी का जल

-सुनीता पाहूजा

किनारे दोनों

किनारे दोनों
साथ-साथ चलते
मिलें न कभी

-सुनीता पाहूजा

नदी की चाह

नदी की चाह
रहने न दे प्यासा
कभी किसी को

-सुनीता पाहूजा

Tuesday, September 13, 2022

अंजान सब

अंजान सब!
कहाँ से कहाँ तक
चलती नदी
-सुनीता पाहूजा

Sunday, August 21, 2022

शक का बीज

शक का बीज
नहीं खिलने देता
रिश्तों के फूल

-सुनीता पाहूजा