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Sunday, March 29, 2026

मीलों चलते

मीलों चलते
ढूँढ़ते चारा-पानी
ऊँट बंजारे
        -डॉ. आरती ‘लोकेश’  

Wednesday, April 24, 2024

बैंच पे लेटी

बैंच पे लेटी 
बतिया रही हिम 
नीरवता से 

    -आरती लोकेश  

ठूँठ कूटते

 ठूँठ कूटते 
नमक की डलियाँ 
मूसल बने

    -आरती लोकेश 

शुभ्र चादर

 शुभ्र चादर 
बर्फ़ का ताना-बाना
सभी को ढके

    -आरती लोकेश 

Thursday, March 09, 2023

झुंड में पक्षी

झुंड में पक्षी 
लाँघ जाते सागर 
एक होकर 

-डॉ. आरती लोकेश

दौड़ती कारें

दौड़ती कारें 
समय से भी तेज़ 
मनुष्य पंगु 

-डॉ. आरती 'लोकेश'

Sunday, January 22, 2023

हाथ के चूहे

हाथ के चूहे
बिल में रख आये
पैन-पेंसिलें 

-डॉ. आरती 'लोकेश'

Monday, November 21, 2022

रेत के टिब्बे

रेत के टिब्बे
भटकें यहाँ वहाँ
मरु-बंजारे 

-डॉ. आरती 'लोकेश'

Thursday, November 03, 2022

ठंडा मौसम

ठंडा मौसम 
मनुष्य है बाहर
पशु भीतर

-डॉ. आरती 'लोकेश'

Tuesday, November 01, 2022

मेघ काफ़िले

मेघ काफ़िले 
बढ़े क्षितिज पर
भू प्रेमी मिले

-डॉ. आरती 'लोकेश '

Wednesday, October 05, 2022

पानी में तैरें

पानी में तैरें 
उद्वेलित बतखें 
शांत लहरें 

-डॉ. आरती 'लोकेश ' 

Friday, September 23, 2022

प्रीतम हूपू

प्रीतम हूपू 
प्रतिद्वंदी भगाए 
आँख फोड़ दे

-डॉ. आरती ‘लोकेश’  
दुबई, यू.ए.ई.



श्वेत मारिया

श्वेत मारिया
खेेलें संंग शावक 
सींग मार के 

-आरती लोकेश


[मारिया अंग्रेजी में अरेबियन ऑरिक्स कहलाता है। यह हिरन की प्रजाति का है। यह मृग दुनिया-भर से विलुप्त हो चुका। अब केवल यू.ए.ई में ही जीवित बचा हुआ है।]



Tuesday, September 20, 2022

ठुमकें दौड़ें

ठुमकें, दौड़ें 
दुकुबड़े जमल 
दिशा दिखाएँ

-डॉ. आरती 'लोकेश' 
                                                                                                                                               
 (अरबी भाषा में ऊँट को 'जमल' कहते हैं)  



Thursday, September 15, 2022

बाज़ का खेल

बाज़ का खेल 
बच्चे बजाते ताली 
छिना निवाला

 -डॉ. आरती ‘लोकेश’  

Wednesday, September 14, 2022

उनींदी धूप

उनींदी धूप 
आँख मिचमिचाए 
मेघों को ताके

-आरती लोकेश

पीर, पीर-सी

पीर, पीर-सी
कुछ शक्ति दे जाती 
जब भी आती

-आरती लोकेश

तोड़ के बाँध

तोड़ के बाँध                             
नदी राह भटकी
आँखों से बही

-आरती लोकेश

स्वप्न के शब्द

स्वप्न के शब्द 
पा मुझे बेडियों में
चुप हो गए

-आरती लोकेश

भूख ने कोसा

भूख ने कोसा 
जिन्हें पीकर पानी
बाढ़ में बहे  

-डॉ. आरती लोकेश