बर्फीली हवा
पर्ण विहीन पौधे
चट्टानें चीखें
-आरती परीख
सूर्य किरणें
दुपट्टे में लपेट
ढलती साँझ
-आरती परीख
संध्या फलक
क्षितिज के मस्तिष्क
सूर्य तिलक
-आरती परीख
भोर की बेला
मुंडी उठाये खड़ा
सूरजमुखी
-आरती परीख
फागुनी हवा
रंगोत्सव का नशा
मौसम जवां
-आरती परीख
पहाड़ी देश
अँगड़ाइयाँ लेती
सड़क खड़ी
-आरती परीख
बैसाखी हवा
सहरा में सजाती
रेत-रंगोली
-आरती परीख
छत में बाग़
मेज़ पे गुलदस्ता
वासंती फाग
-आरती परीख
एकांत पल
जाग उठी इच्छाएँ
सपने बुने
-आरती परीख
तुलसी क्यारी
मुरझाई हुई सी
माँ की याद में
-आरती परीख
जंगल काटा
पेन्सिल से बनाया
सुहाना बाग़
-आरती परीख
अजीब दशा
परदेशी बनाता
पैसे का नशा
-आरती परीख
आधी रात को
तैर रहा झील में
निगोड़ा चाँद
-आरती परीख
कोहरा छाया
अँगड़ाइयाँ लेते
गाँव-शहर
-आरती परीख
दिन-ब-दिन
अच्छे लोग ख़ामोश
बिगड़ा जहाँ
-आरती परीख
होंठों में क़ैद
अनकहे अल्फाज़
आँखों से गिरे
-आरती परीख
नाचती फिरे
गिलहरियों संग
शिशिर धूप
-आरती परीख
टूटी न जुड़ी
सास-बहू की जोड़ी
रेल-पटरी
-आरती परीख
भोर की बेला
मुंडी उठाये खड़ा
सूरजमुखी
-आरती परीख
परिचय-
1.आरती परीख
2. राजकोट, गुजरात
3. खोबर, साउदी अरेबिया
4. 2008 से प्रवासी
5. नहीं
6. नहीं
7. ईमेल-
artinju@gmail.com